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जलती हुई दुनिया पर बैठ कर यह याद करोकितना खेले है हम क़ुदरत से, अब यह याद करोहालातों पर रोने से अब क्या हासिल है जितना किया है बेकसूरों पर, अब वोह ज़ुल्म याद करोगुलामों की तरह क़ैद रखा उनहे तुमने जो आज़ाद पैदा हुए देख लो हर कोने में दुनिया के न जाने कितने तुम्हारे लालच का शिकार हुएतड़पते बिलखते वोह मासूम चेहरे याद करो रोती हुई आखो के समंदर याद करोतुम्हारी ठोकरों पर उनकी पेशानीउनकी बेबसी पर तुम्हारे ठहाकेआज ज़रा अपनी वहशियत याद करोहारे हुए सिकंदर हो तुम इस वबा के दौर मेंजश्न सारे दफ़न है चीखो के शोरे में कभी न सोने वाले शहर, अब शहर ऐ ख़मोशा है अस्पताल क़ब्रिस्तान शमशान,लाशे ही लाशे है शहर के हर छोर में थक गया साइंस तुम्हारादवाये भी लाइलाज हैबाकी बस, अब एक ही इलाज है मिटा दे जो वायरस बद्दुआओं का वक़्त है की अब ऐसा कोई वैक्सीन ईजाद करोजलती हुई दुनिया पर बैठ कर यह याद करोमिटा दे जो वायरस बद्दुआओं का वक़्त है की अब ऐसा कोई वैक्सीन ईजाद करो-zaki "Zaki's Gift Of Love"

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