याद है अब भी वो बचपन की बेफिक्र दुनिया छोटी सी ज़िद और ढेरों खुशियां दौड़ते-भागते, खबर थी क्याकि वक़्त कुछ यूं दौड़ेगा, ज़िन्दगी कुछ यूं मुड़ेगी कि उम्र को पछाड़ तज़ुर्बा आगे, मीलों आगे होगा। अब सोचते हैंजेब में लिए फिरते थे ज़िन्दगी आलम ये है कि अब दिखाई भी नहीं देती।
SEE AUTHOR
Quote:- ये पटना शहर गंगा जी जैसा है। सबका पाप धो लेता है। सबको समाहित कर लेता है अपने अंदर। कभी बरसात में पटना में गंगा किनारे जाइए। सब जलमग्न दीखता है - क्षितिज तक। घोर मटमैला। लगता है प्रलय आ गया। आ उसी में घोराए हुए पानी में बीच-बीच में बहता हुआ दीख जाता है- कभी छप्पर तो कभी कोई जीव। कहीं दूर दीख जाते हैं किसी बहते से टीले पर बैठे हुए कौवे। वो होती है किसी प्राणी की लाश। गंगा सब लिए जाती है। जो उसमें पड़ जाए। बिना शिकायत। वैसे ही है ये शहर। उसके बाद उसी से उपजाऊ भी तो बनता है ये पूरा बेल्ट। आप को नरक भी मिलेगा लेकिन सब एक साथ देखेंगे तो सर झुका कर प्रणाम कर लेंगे। जब शांत हो तब इधर डुबकी लगाइए।
लेबंटी चाह | Lebanti Chah
Author:- Abhishek Ojha
Category:- motivational
Quote:- वक्त की सबसे ख़ास बात ये होती है कि वो गुज़र जाता है।
Author:- Tarang Sinha
Category:- Life,time
Quote:- वो अनदेखा साख़्वाब था जो पलकों में ठहर गया न तुमने कहा न वो आगे बढ़ा
Wo Lamha
Author:- Pushpindra Chagti Bhandari
Category:- Love
Quote:- श्रीओम को ज्ञान सबै भन्दा पहिला २०६५ साल मार्ग शिर्ष महिनाको एकादशी तिथि को दिनमा पोखरा को फेवा तालमा साझा को ५ /६ बजे तिर विष्णु भगवान को दर्शन बाट सुरु भएको थियो । श्रीओमले २०७२ भाद्र २९ गुरु पुर्णिमाको दिन जर्मनी इस्थित हमबर्ग राज्य को कुर्पुंदर लेकमा दिउसो जनै लगाए पश्चात आफ्नै हृदय भित्रबाट शिव भवम भवानी र श्री सुर्य भगवानलाई अनि आमा बुवा को आत्मा लाई हृदयभित्रबाट ज्ञान सुनाउनु भयको थियो, तेस् पश्चात श्रीओमले २०७५ एकादशी तिथि को दिनमा अमेरिका स्थित मेन राज्येको ब्रंस्विक भन्ने ठाउमा प्रतक्षे दृश्य र सम्बादको साथमा दिनको ९/९,१५ बजे बिहान आफ्नै आत्मा विष्णु, ब्रह्म, नारायण, लाई ज्ञान सुनाउनु भएको थियो भने फेरि २०७६ साल श्रावण एकादशी को दिनमा आल्जेस पोर्तुगल इस्थित समुन्द्री तटमा साझको नित्य किर्या गर्ने बेलामा भगवान महालक्ष्मी, विष्णु संग करिब ३/ ४ मिनेट प्रतक्षे दर्शन भयो भने सोहि समएमा भगवान विष्णुसंग हृदय बाट आवाज को साथमा सम्बाद भयो । २०७७ साल नवोमिको दिनमा आल्जेस बगैचामा साझको सात बजेर ८/१० मिनेट गएको थियो होला किनकि घडी हेरेको थियिन उक्त समयमा श्रीविष्णु,श्रीनारायण, देवी, ब्रह्म, शिव, नारायणी, श्रीओम र आमा बुवा को आत्मा लाई श्रीओमले सिकाउनु भयो र श्री विष्णु, श्रीओम ले आफैले आफ्नै स्वोरुप मा संख चक्र धारण गर्नु भयो भने श्रीओमले देवी लाई पनि संख चक्र दिनु भयो, श्रीओम ले संख चक्र दिए पछि उक्त द्रिश्येमा उक्त समयमा देवी गायेत्री रथ को साथमा, महालक्ष्मी, शिव र नारायणी ,गणेश, गुरु रुद्र, मात्री शक्ति लगाएतका देवी देवता पनि संगै देखे, यो दृश्य खुल्ला आखा बाट देखिएको लगभग १०/१५ मिनेट को थियो । यद्यपि यो ज्ञान खरबौ बर्ष देखि लोप भएको रहेछ खरबौ बर्ष पछाडी श्रीओमको यो प्रिथिवी मा प्रार्दुभाव भएको रहेछ यो कुरा पनि हृदयबाट सुने,२०७२ देखि २०७७ सालको पाच बर्सको धेरै पटक को समाधि, आत्मा ज्ञान, आत्मा बाणी र दृश्य यो बर्षमा आएर संख चक्र धारण भयो - श्रीओम
Author:- Shreeom Surye shiva devkota
Category:- knowledge
Quote:- श्रीओमले ज्ञान को सुरुमा भगवान श्री सुर्य र भगवान श्री भवम भवानी लाइ आफ्नो धर्म योग भन्नु भयो। श्रीओम थानेस्वोर र दिब्य कुमारी को जेष्ठ सुपुत्रको रुपमा श्री विष्णु भगवान आत्मा हुनुहुन्छ। श्रीओम प्रिथिविलाई आवोसेक परेको बेलामा पानि पार्ने र अनावोसेक भएको बेलामा पानि रोक्ने पनि श्रीओम नै हुनुहुन्छा। श्रीओम हिन्दु बैदिक सत्य सनातन धर्मको रक्षेक हुनुहुन्छा भने साधु सन्त महन्त ज्ञानी सज्जन महिला पुरुष हरुको रक्षेक र सबै प्राणी हरुलाई समान रुपमा हेर्नु हुन्छा तथा श्रीओम अजन्मा आत्मा हुनुहुन्छा
Author:- shreeom
Category:- knowledge
Quote:- सब कुछ हो सकता है पर हम फिर से वो नहीं हो सकते जो दिल टूटने के पहले हुआ करते थे।
लेबंटी चाह | Lebanti Chah
Author:- Abhishek Ojha
Category:- Relationships,motivational
Quote:- समझदार हैं इसीलिए तो उलझ गए। इंटेलेक्चुअल लोगों के ही प्यार का विध्वंस होता है। जो समझने की चीज़ ही नहीं उसे समझने का भ्रम। जिन्हें ये भ्रम हो उनके साथ ऐसा ही तो होगा।
लेबंटी चाह | Lebanti Chah
Author:- Abhishek Ojha
Category:- Relationships,motivational
Quote:- सोचिए तो.. कुछ भी तो नहीं.और सोचिए तो.. इतना कि सोचते ही रह जाइए.
लेबंटी चाह | Lebanti Chah
Author:- Abhishek Ojha
Category:- motivational
Quote:- हमें हमेशा अपनी और दूसरों की गलतियों से सबक लेते हुऐ बस आगें बढ़ते रहना चाहिए, और मेरे हिसाब से, जो आदमी अपनी गलतियों से सीख लेते हैं शायद ही वो कभी आगें पछतातें हो।
Author:- Salim Khan Anmol
Category:- Life
Quote:- हर वक़्त को बदलने के लिये थोडा वक़्त दो, वो वक़्त भी बदल गया था, ये वक़्त भी बदल जायेगा
Author:- Anuj Jasani
Category:- motivational
Quote:- हे आम बुवा, धार्मिक शाधू, सन्त, पण्डित, ज्ञानी, ब्रमचारी र सात्विक,राजस्विक, स्वोस्थ र सत्य बोल्ने महिला तथा पुरुषहरु म तपाईहरुलाई अत्येधिक माया गर्छु किनकि तपाईहरुकै धर्म को कारणले मेरो आत्मा अनेकौ युग हरुमा अजर अमर अविनाशी छ। मेरो स्वोरुप देखन देवी देवता हरु पनि लालाहित हुनुहुन्छ तेसैकारनले वहा हरु बेला मौकामा मेरो दर्शन गर्न आउनु हुन्छ। मात्र आत्मा ज्ञानी व्यक्तिहरु तथा दृष्टि प्राप्त आत्मा ज्ञानी हरुले मात्र मेरो वास्तविक स्वोरुपको दर्शन गर्न सक्नु हुन्छ। आत्मा, बुद्धि मन देखि मेरो सुभ चिन्तन मनन तथा ब्याख्या भक्ति गर्ने व्यक्ति हरुलाई मैले जन्म मरण को बन्धन बाट मुक्त गर्छु। कसैले निन्दा गरोस या स्तुती बराबर मान्ने, कसैलाई नचाहिने मनोकल्पित आरोप नलगाउने, सुखी सन्तोषी वैष्णवी, स्थिर बुद्धि भएका दैनिक केहि समय अध्यात्मिक तथा धार्मिक कार्यमा मन बुद्धि आत्मा लगाउने महिला तथा सज्जन बृन्दहरुनै मेरो प्यारो हुनुहुन्छ। श्रीओम
Author:- Shreeom
Category:- knowledge
Quote:- আগুন পোড়ালে তবু কিছু রাখেকিছু থাকে,হোক না তা ধূসর শ্যামল রঙ ছাই,মানুষে পোড়ালে আর কিছুই রাখে নাকিচ্ছু থাকে না,খাঁ খাঁ বিরান..
Author:- Helal Hafiz
Category:- poetry
Quote:- আচ্ছা বলুন তো, কেন স্রষ্টার অস্তিত্বের ব্যাপার আসলেই আমরা বিশেষ বিশেষ মাত্রাতিরিক্ত মানদণ্ড প্রয়োগ করতে শুরু করি? স্রষ্টার ব্যাপারে জটিল যুক্তির কোনই প্রয়োজন নেই আমাদের। সাধারণ ফাংশনাল রিজনিংই আমাদের জন্য যথেষ্ট, এতেই সমাধান এবং আমি চাই আজ আমরা তাই প্রয়োগ করি। কারণ আমি কিছু বাস্তব বিষয় আলোচনা করতে চাই। চলুন আমরা এই বাস্তবতাগুলোকে প্রশ্ন করি এবং আমাদের ফাংশনাল রিজনিং ক্ষমতা ব্যবহার করে দেখি কোনটি এই বাস্তবতাগুলোর সর্বোত্তম ব্যাখ্যা দেয় – স্রষ্টার অস্তিত্ব না বস্তুবাদ বা নাস্তিকতা?
বিশ্বাসের যৌক্তিকতা
Author:- Rafan Ahmed
Category:- science
Quote:- আধুনিক বিজ্ঞান মানুষকে দিয়েছে বেগ, কিন্তু কেড়ে নিয়েছে আবেগ। তাতে আছে গতির আনন্দ, নেই যতির আয়েস।
দৃষ্টিপাত
Author:- Binoy Mukhopadhyay (Jajabor)
Category:- science
Quote:- আমি অতো তাড়াতাড়ি কোথাও যেতে চাই না;আমার জীবন যা চায় সেখানে হেঁটে হেঁটে পৌঁছুবার সময় আছে,পৌঁছে অনেকক্ষণ বসে অপেক্ষা করবার অবসর আছে।জীবনের বিবিধ অত্যাশ্চর্য সফলতার উত্তেজনাঅন্য সবাই বহন করে করুক; আমি প্রয়োজন বোধ করি না :আমি এক গভীরভাবে অচল মানুষহয়তো এই নবীন শতাব্দীতেনক্ষত্রের নিচে।
জীবনানন্দ দাশ কবিতা সমগ্র
Author:- Jibanananda Das
Category:- time,philosophy
Quote:- কোথায় যেন পড়েছি, কবি দুঃখ করে বলেছেন,'আমি মানস সরোবরের যেন ডানা-ভাঙ্গা রাজহাঁস। চতুর্দিকের জল জমে গিয়ে বরফ হয়ে হয়ে আমার দিকে এগিয়ে আসছে,শেষটায় আমাকে পিষে মারবে। আমার সঙ্গী-সাথিরা অনেকদিন হল দক্ষিণে চএ গিয়েছে। আমার যাবার উপায় নেই।' হায়, আমাদের সকলেরই তাই। কারও পা খোঁড়া, কারও ডানা ভাঙা, কারও প্রিয়া পালিয়ে গিয়েছে, কাউকে বা সরকার জেলে পুরে দিয়েছে- সবাই যেন বলছে, পিছিয়ে পড়েছি আমি, যাব যে কি করে!
Author:- Sayed Mujtaba Ali
Category:- Life
